ajnabi_abhishek

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Ajnabi rahne ka bhi apna maza hai

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Reposts
  • ajnabi_abhishek 1w

    बहुत समय बाद समय मिला है.....
    मुखड़ा पेश है गीत एक-दो दिवस में हाज़िर होगा..!

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    मुखड़ा-आँखें-गीत

    सागर से तुलना करना तौहीन है उसकी आँखों की।
    सागर तो एक पत्ती ठहरा उस दरख़्त के शाखों की।।
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 6w

    प्रेम

    प्रेम में मिलन के लिए
    दूर होना पड़ता है, बहुत दूर।

    दूर होने पर मिलन वैसा ही होगा,
    जैसा क्षैतिज में होता है।

    पृथ्वी और आकाश का।।

    ©अभिषेक_अजनबी

  • ajnabi_abhishek 11w

    यहां अजनबी दो हैं-एक मेरे लिए, दूसरा मै उसके लिए।

    #rachanaprati105 #Abhishek_Aznabi @happy81 @anusugandh @vipin_bahar @mamtapoet @abr_e_shayari @suryamprachands @goldenwrites_jakir @alkatripathi @raakhaa_ @rahat_samrat

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    गीत-इंतज़ार

    कर रहा तू कहां, इंतज़ार अजनबी।
    मैं हूँ तन्हा यहां, बेक़रार अजनबी।।

    लापता है पता, तू कहां है बता।
    पूर्ण हूं मैं तेरा, हक़ ज़रा तो जता।
    दिल की धक-धक में हो, बेशुमार अजनबी।
    मैं हूँ तन्हा यहां, बेक़रार अजनबी।।

    ज़ुल्फ़ से खेलना, चाहती उंगलियां।
    लब तेरे चूमना, चाहती उंगलियां।।
    तुझ पे सौ-सौ जनम हैं निसार अजनबी।
    कर रहा तू कहां, इंतज़ार अजनबी।।

    रात मदहोश है, दिन में कब होश है।
    होगा तुम से मिलन, सोंचकर जोश है।
    सुन लो अब तो मेरी, इक पुकार अजनबी।
    कर रहा तू कहां, इंतज़ार अजनबी।।

    मैं हूँ तन्हा यहां, बेक़रार अजनबी।
    कर रहा हूं तेरा, इंतज़ार अजनबी।।
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 12w

    मुक्तक

    चाँद को आफ़ताब कर डाला।
    और पानी शराब कर डाला।
    अब तलक मैं भी था पत्त्थर का सनम
    उसने छू कर गुलाब कर डाला।।
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 12w

    #rachanaprati103

    मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम जैसे गंभीर विषय पर थोड़ा अलग हटकर हास्य व्यंग्य लिखने का प्रयास किया है...किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमज्ञापन पूर्वप्रेषित है...

    #Abhishek_Aznabi #Hindiwriters @suryamprachands @anusugandh @loveneetm @happy81 @anandbarun @goldenwrites_jakir @mamtapoet @piu_writes @psprem @jigna_a

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    श्रीराम-व्यंग्य

    कलियुग में श्रीराम आप जो पधारे कहीं।
    सच कहता हूं भ्रष्टाचार मार डालेगा।
    रथ नहीं होगा ख़ुद की कार से चलेंगे आप।
    पेट्रोल के दाम का प्रहार मार डालेगा।
    नन्ही-नन्ही कली भंवरे का मुख चूम रही।
    सच कहता हूं व्यभिचार मार डालेगा।
    सीताजी मिलेंगी नहीं ढूंढने से अब कहीं।
    सूर्पनखा के प्यार का बुख़ार मार डालेगा।।
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 12w

    परिणाम

    #rachanaprati102 के संचालन का कार्यभार सौंपने के लिए एक बार पुनः @anusugandh जी का आभार। मेरे द्वारा सुझाये गए विषय पर सभी रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की और इस कड़ी को सफलता दिलाई जिसके लिए मैं सभी लेखकों-सह-पाठकों का हृदय से आभारी हूँ। सयोंग पर इतना कुछ लिखा जा सकता है, ये देखकर मैं अभिभूत हूं। @loveneetm @suryamprachands @anandbarun @anusugandh @piu_writes @psprem @goldenwrites_jakir @happy81 @jigna_a आप सभी ने उम्दा कृतियां रचकर इस श्रृंखला को शिखर तक पहुंचाया जिसके लिए एक बार पुनः सभी का आभार प्रकट करता हूँ। वैसे तो सभी रचनाएं श्रेष्ठ हैं, कारणवश चुनाव किंचित जटिल है।
    किन्तु किसी एक को चुनना इस कड़ी को आगे बढ़ाना अनिवार्य कर्तव्य है। अतः मैं उपहारस्वरूप अगला संचालन @suryamprachands जी को सौंपता हूं।

    जाने-अनजाने कारित किसी भी भूल-चूक के लिए सभी से क्षमा याचना सहित आपका अपना-
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 13w

    कल से मन द्रवित है...प्रस्तुत है एक घनाक्षरी छंद...

    #Abhishek_Aznabi @sanjeevshukla_ @vipin_bahar @anusugandh @raakhaa_ @anandbarun @rani_shri @vasudhagoyal @parle_g @dil_k_ahsaas @rangkarmi_anuj

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    क्रिकेट

    पहले तो बल्लेबाजी, दुबई में नही छाजी।
    बाद गेंद बाज सारे, पिटते चले गए।।
    दिल मे दबी चिंगारी, शोला नहीं हुई भारी।
    दोष सारा ओस पर, मढ़ते चले गए।।
    एक हार का ये ग़म, शत से भी है अधम।
    कल जो दबे थे आज, चढ़ते चले गए।।
    जीत का था इतिहास, जो न अब रहा पास।
    बेटे इतिहास नया, गढ़ते चले गए।।
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 13w

    कार्यालय में कार्यभार अधिक होने के कारण हुए विलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूं....

    #rachanaprati102

    @anusugandh @goldenwrites_jakir @mamtapoet @anandbarun @piu_writes

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    रचनाप्रति

    सर्वप्रथम @anusugandh जी को सफल संचालन की हार्दिक बधाई एवं मुझे रचनाप्रति की अगली कड़ी (#rachanaprati102) के संचालन हेतु योग्य समझने के लिए सहृदय आभार। सभी सहित्य साधक रचना हेतु आमंत्रित हैं।
    #rachanaprati102
    विषय_संयोग
    समय-सीमा_27 अक्टूबर अपराह्न 12:00 बजे तक।

    गुणा-भाग हम भूल गए, भूल गए हर योग।
    नज़रों से नज़रें मिली, बना सुगम सयोंग।।
    ✍️✍️✍️✍️✍️
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 13w

    प्रयास किया है #rachanaprati101 के विषय को समाहित करते हुए एक एक छोटा सा गीत लिखने का....उम्मीद है आपकी उम्मीद नहीं टूटी होगी....

    शब्दार्थ- (1) अभिलाषी-इच्छुक, चाहने वाला।
    (2) थाती--धरोहर, पूंजी।

    #Abhishek_Aznabi #hindiwriters @sanjeevshukla_ @anusugandh @raakhaa_ @vipin_bahar @goldenwrites_jakir @psprem @alkatripathi @junaidwrites @rani_shri @dil_k_ahsaas

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    जीवनसाथी

    तेरा मेरा रिश्ता ऐसा,
    जैसे दीपक--बाती।
    ओ मेरे जीवनसाथी,
    ओ मेरे जीवनसाथी।।

    मैं नाविक पतवार तुम्ही हो।
    मुझमे हिस्सेदार तुम्ही हो।
    ये दुनिया है स्वप्नों जैसी।
    स्वप्नों का संसार तुम्ही हो।।
    तू मेरी अभिलाषी है और..2
    मैं तेरा अभिलाषी।
    ओ मेरे जीवन-साथी।
    ओ मेरे जीवन-साथी।।

    मेरी कलम की धार तुम्ही हो।
    गीतों का मेरे सार तुम्ही हो।
    जितना लिक्खा तुमको लिक्खा।
    लेखन का आधार तुम्ही हो।।
    जन्म-जन्म से संचित की जो,
    तू वो ही है थाती।।
    ओ मेरे जीवन-साथी।
    ओ मेरे जीवन-साथी।।

    ग्रीष्म की शीत बयार तुम्ही हो।
    शीत में गर्म दुलार तुम्ही हो।
    भीगना चाहे जिसमे ये तन।
    सावन की वो फुहार तुम्ही हो।।
    मैं भी तुझको भाता हूं और,
    तू भी मुझको भाती।।
    ओ मेरे जीवन-साथी।
    ओ मेरे जीवन-साथी।।
    ©ajnabi_abhishek

  • ajnabi_abhishek 13w

    मुक्तक

    हर हिचकी में शामिल होना चाहत है।
    उनकी बाहों में दुनिया की राहत है।
    सुन सकता हूँ क्रंदन मैं फ़ौलादों का।
    पर सिसकी से मन थोड़ा सा आहत है।।
    ©ajnabi_abhishek