agrawal_diary

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jo kh nhi pate, likh kr byaan kr dete h...

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  • agrawal_diary 2d

    Second part ��

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    'ख़ाक' हैं हम, बुलबुले बने फिरते हैं
    बहका देंगे आपको, यूँ बातों में आया न कीजिये...

    अच्छा नही यूँ किसी की ज़िंदगी में झाँकना
    दरीचे बंद किये हैं सारे, 'दरवाज़ा' बजाया न कीजिये...

    नही पड़ता फर्क तुम्हारे 'जख़्मों' से हमको,
    और कुरेद न दे कहीँ, हमको दिखाया न कीजिये...

    बुरे हैं हम बहुत बुरे और ज़ालिम
    'खंज़र' रखते हैं बगल में, दिल अपना लुटाया न कीजिये...

    'अँधेरा' पसंद है हमें इस हद तक जनाब
    कि रौशनी की एक 'तिल्ली' भी, जलाया न कीजिये...

    शौक रखते हैं हम भी 'नवाबों' वाले,
    पर हैं फटेहाल, किसी को बताया न कीजिये...

    चलिए दफ़ा होते हैं हम आपकी महफ़िल से
    ये चार लोग बुलाकर, 'भीड़' सजाया न कीजिये...
    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 3d

    मजबूर की मजबूरी... करनी पड़े जी हजूरी...!!

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    'पतंग' देखी तो उड़ने का मन किया
    पर पर फैलाये तो कतरने का 'डर' था...

    थी 'डोर' मेरी उस शख़्स के हाथ में,
    कर्ज़े के बोझ से जिसका नीचे 'सर' था...

    कोशिश की बताऊँ उड़ान दिल की
    पर कहता किससे, हर कोई 'बेख़बर' था...

    इंतज़ार किया, सब सहा, सही वक्त की तलाश में,
    ज़िन्दगी गुज़र गयी, मेरे में इतना 'सब्र' था...

    ग़लती मेरी थी जो तुम पे भरोसा किया
    उम्मीद बाँधी उससे, जिसपे सब 'बेअसर' था...
    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 4d

    बस यूँही लिखा है����

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    हम 'नासमझ' हैं, हमें समझाया न कीजिये
    बहुत क़ीमती होता है वक़्त, यूँ ज़ाया न कीजिये...

    कि एक ही ढर्रे पे चल रही है ये ज़िंदगानी
    आप बदलने को हमें, आया न कीजिये...

    हम 'पत्थर' जैसे हैं, हमसे दूर रहें
    सिर पटक कर ज़ख्म लगाया न कीजिये...

    हमको तराशने में क्यों उलझ रहें भला आप
    हम तो 'ठोकर' हैं, हमें किनारा कीजिये...

    मतलब की बात करते हैं, तेरे मेरे बीच की,
    कि हम 'अजनबी' सही, हमसे याराना न कीजिये...
    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 5d

    हर बात कही नही जाती....!!��

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    जरूरी नही मेरा 'लहज़ा' प्यार भरा हो..

    मेरी 'परवाह' से अपनी अहमियत समझ लो!!
    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 1w

    सिर्फ प्यार अधूरा नही रहता
    दो लोग भी अधूरे रह जाते हैं

    वादे ...यादें बन जाती
    बातें... किस्से बन जाते हैं

    जो जुड़े थे एक दूजे से कभी
    अलग अलग दो हिस्से बन जाते हैं

    जो सह नही पाते थे बिछड़न
    बाद में ना जाने क्या क्या सह जाते हैं

    एक खरोंच भी आये यार पे तो रो देते थे
    आज आँखोँ से उनकी समुंदर सूखे ही बह जाते हैं

    जो कह न पाए कभी दर्द-ए-दिल अपना
    शायद वो शायरी में अपनी बात कह जाते हैं...!!
    Meenu

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    जो जुड़े थे एक दूजे से कभी

    अलग अलग दो 'हिस्से' बन जाते हैं...!!

    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 1w

    तुमको ना भूल पाएँगे ...!!

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    खुद को भूल रहे हैं हम,

    पर 'तुम'... आज भी याद हो ...!!
    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 1w

    ��

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    .

  • agrawal_diary 1w

    Pc goes to me ������������

    पहली बार उड़ान भरी थी,
    मैं और माँ साथ चली थी,
    थोड़ा डर लग रहा था,
    पर मन में लड्डू फूट रहा था...

    जब आकाश में ऊपर आये,
    धरती अम्बर समझ ना आये,
    दिल में हो रही थी हलचल,
    खिड़की से देखा झाँककर...

    सूरज की भीनी लाल रोशनी
    रुई के बादलों की थी सवारी
    ऐसा लगा मानो जन्नत यही
    यही थम जाए दुनिया सारी ..

    मन किया बादल चुरा लूँ,
    जेब में उसको छुपा लूँ
    खिड़की के बाहर कदम रखूँ
    और पैरों से उनको उछालूं

    दूर कहीँ पे दिखता सूरज
    जैसे डूबता वो जा रहा,
    चंदा कहे मैं भी चलूँ साथ
    उसका रूप सलोना भा रहा..

    पर सफ़र तो सफ़र होता है
    खत्म भी हो गया
    पर जो नज़ारे आँखों में बस गए,
    बस अपना वो हो गया...
    Meenu agrawal

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    पहली उड़ान

    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 2w

    ये जगह सिर्फ तुम्हारी है��������

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    ख्यालों की 'दहलीज़' पे बैठा है कोई...

    पहरा सख़्त है...

    किसी और का अंदर आना मुमकिन नही...!!
    ©agrawal_diary

  • agrawal_diary 2w

    महादेवी वर्मा जी की एक और कविता लिखने का प्रयास ����

    दूर कहीँ ये उड़ आयी है
    घर अपना भूल आयी है
    परिवार पीछे रह गया
    दुनिया अपनी गवाँ आयी है

    क्या फिर से नया आशियाना बुनेगी...?
    अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी..?

    भटक गयी है घर का रास्ता
    दिखे नही कोई अपना
    आँसू गिराए याद में घर की
    घर वापिस जाना लगे है सपना

    क्या ये दुनिया की मार सहेगी...?
    अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी..?

    छोटी सी नन्ही सी है
    उड़ना नया नया सीखा है
    बाज़ की नज़रों से छुप के भागी
    दिल डर से इसका पसीजा है

    क्या ये आसमान ओढ़ के सोएगी...?
    अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी..?

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    अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी..?

    ©agrawal_diary