adhure_lafj

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���� Live Shayari ©Copyright लेखक Hindi-Urdu-Punjabi-English. Personal Blog��

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  • adhure_lafj 14w

    ★प्यार★

    मुझे किश्तों-किश्तों में प्यार नहीं चाहिए,
    हम-सफर चाहिए, मददगार नहीं चाहिए,

    चाहिए कोई ऐसा जो समझे जज्बात मेरे,
    परवाह करे मेरी हो जैसे भी हालत मेरे,

    इबादतों में जिस के सर झुकाना पड़े,
    ऐसा परवरदिगार नहीं चाहिए,

    ख्याल रखा जाए बराबर मेरी हसरतों का,
    हिसाब हो उसे भी मेरी जरूरतों का,

    दिन रात जिसे वक्त ही न हो,
    उतना बड़ा भी साहूकार नहीं चाहिए,

    हो फुर्सत उसे भी, मुझे भी,
    हो समझ उसे भी, मुझे भी,

    हर वक्त ही भूत सा चिपका रहे,
    ऐसा भी चौकीदार नहीं चाहिए,

    मुझे किश्तों-किश्तों में प्यार नहीं चाहिए,
    हम-सफर चाहिए, मददगार नहीं चाहिए।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 14w

    ★अंदाज★

    कैसा था लहज़ा अपना, बर्ताव कैसा था,
    अंजाम कैसा था, आगाज़ कैसा था,

    हुआ था जो बीच में, तेरे नाम का भी चर्चा,
    बताओ सुखनवर का, वो अंदाज कैसा था।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 64w

    ★हिंदुस्तान★

    किसी को चाहिए खुदमुख्तारी, किसी को अलग ही नाम चाहिए,
    किसी को कुबूल है नमस्ते यहाँ, किसी को सिर्फ और सिर्फ सलाम चाहिए,
    मरना है किसी को आब-ए-हयात में डूबकर,
    किसी को मर कर के गँगा का स्नान चाहिए,
    मैं वो हूँ, तुम में वो बात नहीं,
    हम को हक्क चाहिए कोई ख़ैरात नहीं,
    चिल्ला रहे हों मानों एक दूसरे को नोच खानें को,
    किसी को अल्लाह, किसी को भगवान चाहिए,
    शहर-ए-अमन में यहाँ अपनी सबको,
    चलती सियासती नफ़रत की दुकान चाहिए,
    मजहबी कोई है नहीं, अजी आप तो चुप ही रहिए,
    बस जरा सी हटके सबको एक पहचान चाहिए,
    टस से मस नहीं होते हैं लोग जरा से भी,
    मगर खुद का ही बस एहतराम चाहिए,
    बंदगी क्या है, इबादत है चीज़ क्या मालूम नहीं,
    किसी को प्रभात फेरी, किसी को अजान चाहिए,
    न मोहब्बत है दिलों में, न बाकी चाहत बची है,
    फिर भी लोगों को पुराना, वो हिंदुस्तान चाहिए,
    बन सकते हो यहाँ हिन्दू-मुसलमाँ आप बेशक,
    मग़र बनने को इंसान साफ नियत और अच्छा ईमान चाहिए।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 64w

    ★तुम★

    कभी कभी सोचता हूँ, कौन हो तुम, इतना अल्हड़, बेबाक, मनमौजी, आख़िर कौन होता है इस दौर में? बहुत सोचा, इधर-उधर दिमाग दौड़ाया मग़र कुछ सुझा नहीं, थक हार कर नीम तले बैठ गया, फिर अचानक से नजर गई सामनें नदी पे, जहाँ बहुत से भोले परिन्दें, खूंखार जानवर अपनी प्यार बुझाने आए थे, अरे ये क्या इतना भी कोई चंचल होता है भला? अब एक बच्चे नें शरारत में पत्थर दे फेंका, ले उल्टा पानी से भिगो दिया उसे, ये क्या था, शरारत उसकी? बड़ा बेग है उसमें, बहती है जब मानों लगता है कोई राग छेड़ा गया है, तो तुम आदतन, गुनगुनाती भी हो, और बरसात में लाल एकदम गुस्से में वो गर्जना तेरी, तो गुसैल भी हो, बेशक तुम वही हो।

  • adhure_lafj 71w

    ★नज़ारे★

    रात को न चाँद दिखता है,
    और तारे भी नहीं दिखते,

    शहर की इस चकाचौंध में,
    मेरे गाँव से नजारे नहीं दिखते।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 84w

    ★महिला दिवस★

    क्या मज़ाल कि अपनें लक्ष्य से,
    रत्ती भर भी इधर का उधर हो जाएं,

    इतना अचूक निशाना तो स्वयं,
    धनुधर अर्जुन का भी नहीं था,

    और फिर आँचल को भेदती हुई नजरें,
    सीधा सीनें से जाकर टकराती थी,

    वाक्या लोकल ट्रेन में,
    मेरे बराबर की सीट का था,

    कभी आँखों से आँखों का टकराव हो जाए तो,
    गर्दन झुकाकर सर खुजलाने लगते,
    जैसे कुछ हुआ ही न हो,

    हैरत तो तब हुई जब अगले महिला दिवस के दिन अखबार के बुद्धिजीवियों वाले पृष्ठ पर उन्हीं महाशय का डिग्रियों के साथ नाम, ओहदा, चेहरा छपा हुआ देखा, और बड़े अक्षरों में,
    लेख का शीर्षक लिखा था "नारी शशक्तिकरण"।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 88w

    ★बदलाव★

    हर एक चीज बड़ी तेजी से बदल रही है या किसी न किसी प्रारुप में वो बदलाव से जुड़ी है, और बदलना जरुरी भी है क्योंकि बदलाव जीवन का दूसरा नाम है, ये कालचक्र है, मग़र इस बदलाव की सीमा क्या है? अगर सब कुछ बदल दिया गया तो शुद्धता का मापक क्या होगा, क्या वो चीज होगी जिसे देखकर हम फर्क करेंगें, क्या वो मूलत्व केवल किताबों तक ही सीमित रह जाएगा? फिर असली और नकली की पहचान कैसे की जाएगी? क्या इस बदलाव का कोई अंत है? ऐसे अनंत प्रश्न हैं, जब कृत्रिमता हर तरफ छा जाएगी तो क्या अपूर्वता विलुप्त हो जाएगी? मगर साथ ही साथ मैं कुछ चीजों पे आपका ध्यान ले जाना चाहूंगा, मान लीजिए आपको आपार खुशी की अनुभूति हुई, आप मुस्कुरानें या हंसने लगे, आपका दुख के चरम पर है, आपके अश्रु छलक गए, ये भाव हैं, आप भावनाओं को रोक सकते हैं, पर उससे अछूता नहीं रह सकते, जब सूर्य का प्रकाश जल पर गिरता है, उससे वाष्पीकरण होता है, वो आगे चलकर बादलों में बदल जाता है, वही बादल फिरसे जमीन को भिगोकर आद्र कर देते हैं, ये चक्र है, सदियों से चलता आ रहा है, चलता रहेगा, उस गीली धरा में बीज गिरकर फूट जाएगा, फिर पोषण पाकर एक दिन परिपक्व पेड़ बन जाएगा, उसमें खुशबूदार फूल खिलेंगे, मीठे फल लगेंगे, कोई थका हार पथिक उसकी छाया में बैठकर अपना पसीना सुखाएगा, ये चक्र है, बदलाव से अछूता, बेशक़ बदलाव भी जरूरी है पर कुछ मूलत्व चीजें हैं जिनपर बदलाव का रत्ती भर भी असर नहीं और होना भी नहीं चाहिए, जिस दिन ऐसा हुआ, वो जीवन का अंत होगा।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 89w

    ★सफ़र★

    इश्क का सफर खौफ़जदा है,
    तुम मासूम हो, ज़रा,
    खुद को बचाकर चलो।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 89w

    ★दूरी★

    ख़फ़ा तो हूँ, तुम से,
    एक बात, कह दूं मग़र,

    बड़ा खलता है, कसम से,
    हम को, ये दूर जाना तेरा।
    ©adhure_lafj

  • adhure_lafj 91w

    ★हाल★

    चलो अब,
    चुप हो जाते हैं,

    सुनो! हाल-ए-दिल अपना,
    अब हम, आखों से सुनाते हैं।
    ©adhure_lafj