abhipriyashrivastaw

Engineer by Education... Poetess by heart♥

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  • abhipriyashrivastaw 9w

    लिख लेती हूँ!

    जब बोल नहीं पाती तो लिख लेती हूँ।
    जब हँस नहीं पाती तो रो लेती हूँ।
    कोई सुनने वाला ना हो तो लिख लेती हूँ।
    कभी सन्नाटे गूँजते हैं तो चीख लेती हूँ।
    तन्हाईयों से भी मैं सीख लेती हूँ।
    कलम ही तो एक साथी है।
    कभी साथी चाहिए तो लिख लेती हूँ।
    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 9w

    हम-हम नहीं!

    दिल की बातें कहुँ तो किस से कहुँ,
    सब अपनी उल्झनें सुलझाने में मशगूल हैं।
    प्यार तो हम खुद ही छोड़ आये,
    सारे बंधन हम खुद ही तोड़ आये।
    ख़फा हों तो किस से हों,
    हमसफ़र तो मिला पर वक्त कहाँ है।
    नाराज़गी खुद से ना हो तो किस से हो,
    ये गुस्सा गुस्ताख़ी कही जाये तो गम नहीं।
    अश्कों को पानी कहा जाये तो कम नही,
    हम भी तो जो थे अब वो हम-हम नहीं।
    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 10w

    यादें

    लोग चले जाते हैं,
    बस यादें ही रह जाती हैं।
    कुछ खट्टी-कुछ मीठी,
    कुछ प्यारी-कुछ दुलारी।
    कभी सोते-कभी जगते,
    ज़हन में अा ही जाते हैं।
    वो सुनहरे पल,
    वो बीते हुये कल।
    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 12w

    Fate!

    I like to love and to be loved,
    But inreturn getting all the hate,
    I cry sometimes on my fate!

    I try to make my people happy,
    But i fail to make them feel great,
    I cry sometimes on my fate!

    What destiny is doing to me,
    I can't confabulate,
    I cry sometimes on my fate!

    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 12w

    कोई अपना-सा!

    कोई अपना-सा नहीं लगता,
    शहरें अब विरान हो चली हैं।

    ढूंढो तो कोई मिलता नहीं,
    पुकारो तो बस सन्नाटा गूँजता है।

    दहलीज़ें बस अपनों की राह देखती हैं,
    दीवारें बस अपनों की चाह ढूंढती हैं।

    घर भी अब सूना है,
    परिवार भी अब सूना है।

    कोई अपना-सा नहीं लगता,
    शहरें अब विरान हो चली हैं।
    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 16w

    उल्झन

    उल्झनों के भी हिसाब नहीं होते।
    कई सवालों के भी जवाब नहीं होते।।
    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 16w

    उल्झन और सवाल

    प्यार तो है!
    ये मैं ही करती हूँ या तुम भी करते हो?

    इक़रार भी हुआ!
    पर अब भी कुछ अधूरा सा है।

    कहीं कोई बंदिश तो नहीं जो रोकती है तुमको?
    या वाकई तुम्हारे पास वक्त नहीं।

    कई बार लगता है, वरीयताअों की बात है।
    शायद अभी मैं अाख़िर में आती हूँ।।

    कई सवाल मन में आते हैं।
    अगले ही पल ज़हन से चले भी जाते हैं।।

    उल्झनों के भी हिसाब नहीं होते।
    कई सवालों के भी जवाब नहीं होते।।

    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 18w

    मैं

    जब मैंने खुद को दबाया,
    ज़ख़्मों को यूँ ही हरा पाया।
    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 19w

    तुम्हारी हूँ!

    हाथ जो थामा तो साथ निभाना,
    छोटी-मोटी नोक-झोंक को दिल से न लगाना।

    तुम्हारी हूँ जैसी भी हूँ,
    रूठ जाऊँ तो प्यार से गले लगाना।

    मान जाऊँगी तुम्हारी एक मुस्कान पर,
    बस यूँ ही दिल में हरदम बसाना।

    ©abhipriyashrivastaw

  • abhipriyashrivastaw 19w

    बिन तेरे!

    न दिन सँवरे...
    न रात गुज़रे...
    बिन तेरे!

    ©abhipriyashrivastaw