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Reposts
  • aaftab1995 7w

    Anti Incumbency Days

    That one constant factor deviates at your first appearance
    so much so that it now become the symbol of protest and preservance
    About one destination and self-care
    Which may led to collapse of my government??
    What should I do now??
    You're being requested to join my alliance
    In pursue of shaping the future of every single hand.
    ©aaftab1995

  • aaftab1995 13w

    Simply Autism

    तुम्हें दोहराने के इस सफ़र को अंजाम का पता है,,,,
    खाली हाथ लौट आऊंगा अपनी मंजिल के करीब आकर भी मैं,,
    ये आवाम को पता है,,,
    लम्हों को जोड़कर फिर से तारीख तय होगी तुम तक पहुंचने कि,,,,,२
    ये किसी और को नहीं मेरे नाम को पता है।
    ©aaftab1995

  • aaftab1995 20w

    Extreme & Excellent

    तुम सुकून भी हो,,,सरहद़ भी,,,
    शिकायत भी हो,,, मरकज़ भी,,,,
    बेरोजगारी भी हो,,,,मेहनत भी,,,,,
    उम्मीद भी ,,,,, एहतियात भी,,,,
    इश्क और ,,,, हालात भी,,,,,।
    जिंदगी और शहादत भी,,,
    काफिराना सफर,,, और मोमिन सी इबादत भी,,।
    बहुत कुछ तुम हो इस दिल और दिमाग में,
    वक्त कहानी बयां कर रहा अपने आखिरत और आगाज में ।
    बंद आंखों में बसी उस शहजादी की कहानी आफताब भी अब सुन रहा हैं,,,
    मौहब्बत का तो पता नहीं पर थके शाम का सुकून वो इस कहानी को ही चुना रहा हैं।

  • aaftab1995 21w

    From Nationalist Leader!!

    "It seems like you are the key bordering areas of my country and integrated portions of my soul are there to protect you always although global restrictions on us (all thanks to being active voice of human rights ) , economy crisis and political instability gave some initial gains to the other side of borders,they are trying hard to reshape us but trust my Integrated soldiers,they are capable enough to save us.
    ©aaftab1995

  • aaftab1995 27w

    From successful interview

    "तुम्हें हर्फ दर हर्फ लिखने का काम मिल‌ गया है,,,२
    बहुत सी शिकायतों को अब आराम मिल गया है,,,
    यकिनन , अपनी ख्वाहिशों को हकीकत में तब्दील होते देख पाऊंगा मैं अब,, २
    क्योंकि ,,मेरे देश को भी अब एक कलाम मिल गया है।"
    ©aaftab1995

  • aaftab1995 29w

    Confessions

    "The community of emotions in a locality so called heart are also my citizens. It's been a long time that I have denied their basic right of expression ,equal representation in our legislative Assembly, confiscated their lands,defamed their morals and ethics and bombarded their place of worship
    So today from the very moment ,I grant them what they deserve,morally resigned as a representative of this great country, legally accept my punishment And wish them with goodness for the future."
    Mind
    Prime Minister
    Being Human


    ©aaftab1995

  • aaftab1995 29w

    From Heart's GDP

    बहुत कुछ खोकर वो तुमसे मिलने कि ख्वाहिश रखता है,,,२
    बहुत कुछ है जिनके पास , उन्हें थोड़ा और चाहिए
    उसने तो अपने यकिन को भी खो दिया है तुमसे सवाल कर,,२
    खुद की ही दुनिया में अपनी गुमशुदगी से
    उसे अब तुम्हारी मौजूदगी चाहिए।
    ©aaftab1995

  • aaftab1995 30w

    Not from bacteria culture

    Not labelled with verge of extinction
    But warned with unofficial isolation from some positive bloods
    And at the same time Shakespeare's sonnet are there to let my questions fly like a non veg bird
    If Power creates fears of goodness
    My Pens are there awarded in a school of free will and madness
    So dear authorities extend your Empire
    I will merge them in my world.
    ©aaftab1995

  • aaftab1995 31w

    From Oneness

    We need your face for basic need
    It's not a want of an isolated soul.
    ©aaftab1995

  • aaftab1995 32w

    New Internship!!!

    बहुत कुछ सीखना है तुम्हारी गुमशुदगी को लेकर
    बहुत कुछ सीख लिया है इन मुख्तलिफ चेहरों से मैंने,,,२
    इस बेरोजगारी के मंज़र में
    बहुत सी काबिलियत बेकार हो गई,,
    अब बस तुम्हारा अकीदतमंद बन,, नए हुनर हैं सीखने ।

    तलाश जारी हैं तुम्हारी ,कहां मिलोगे?,,,२
    जो क़िताबें लिखीं हैं तुमने उसे मैं अकेले नहीं समझ सकता
    बहुत कमजोर हूं सवाल सुलझाने में मैं,,,२
    इसलिए तुम्हें कुछ वक्त तो मेरे साथ रहना ही होगा।

    पता है तुम्हें ,जो फिक्र कर तुमने मेरे लिए
    बहुत से उस्तादों को भेजा था,,२
    वो तुम्हारा डर दिखा बच्चों से मजदूरी कराते हैं,,,२
    सीखाना तो दूर वो तुम्हारे नाम से
    हमें डरा ,अपनी मिल्कियत चलाते थे।

    मिल्कियत भी इतनी बड़ी कि
    वो ज़मीन से अब देश बना रहे हैं
    तुम्हारी किताबों को अलग रख
    अपनी सोच वो हमें पढ़ा रहे हैं।


    अब आ भी जाना चाहिए तुम्हें अब
    तुम्हारा शागिर्द बनकर ही मैं नए हुनर सीख पाऊंगा
    डर तो लगता है अपनी बेरोजगारी से अब
    पर उन डरावने उस्तादों के पास मैं अब कभी न जाऊंगा।
    ©aaftab1995