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  • _sourav___singh_ 44w

    MAHADEV the ADIYOGI

    He is the Trinity, He is Eternity,
    He is for the Demons,
    He is for the Gods,
    Peace is he, chaos his ally,
    Beholding the wrath in his third eye,
    In his dreadlocks the purity of
    Ganga lies with a garland of
    Snake around his neck,
    Bow down to
    MAHADEV the ADIYOGI

    ©_sourav___singh_

  • _sourav___singh_ 46w

    "दुनिया में सबसे ताकतवर इंसान वो है जिसका खुद पर नियंत्रण है।"

    ©_sourav___singh_

  • _sourav___singh_ 47w

    "सही दिशा और सही समय का ज्ञान न हो तो उगता हुआ सूरज भी डूबता हुआ दिखता है।"

  • _sourav___singh_ 50w

    "जब किसी भी व्यक्ति को लेकर यह शंका उत्पन्न हो जाए कि इस पर विश्वास करना है या नही, तो सतर्क हो जाओ क्योंकि वो शंका ही तुम्हारे सारे प्रश्नों का उत्तर तुम्हे दे रही है।"

    ©_sourav___singh_

  • _sourav___singh_ 50w

    "अगर तुम उस व्यक्ति को खोज रहे हो जो तुम्हारा जीवन बदल दे, तो अवश्य ही तुम कुछ गलत खोज रहे हो।"

    ©_sourav___singh_

  • _sourav___singh_ 51w

    "परिस्थिति बदलना जब मुमकिन न हो तो मन की स्थिति बदल लीजिये सब कुछ अपने आप ही बदल जायेगा।"

    ©_sourav___singh_

  • _sourav___singh_ 51w

    "लक्ष्य छोड़ देने की इच्छा सदैव मन में आयेगी और तुम्हारी इच्छाशक्ति ही तुम्हे इस संकट से बचाएगी।"

    ©_सौरव_सिंह_

  • _sourav___singh_ 51w

    "व्यर्थ विवादों में मत पड़ो, व्यर्थ झगड़ो में मत पड़ो क्योंकि जिस दिन तुम्हारी ऊर्जा विवादों में उलझ गई, उस दिन तुम्हे सर्वोच्च हानि का आभास होने लगेगा।"

    ©_सौरव_सिंह_

  • _sourav___singh_ 56w

    अटल था वो "अटल!

    एक क्रांतिकारी सोच थी जिसकी,
    कई युगों का समावेश सा जिसमें,
    साम्प्रदायिकता खत्म करने में हुआ सफ़ल।

    अटल था वो "अटल!

    उत्तम श्रेणी का था नेता,
    कुशल राजनीतिज्ञ, अद्भुत प्रवक्ता,
    सच,मेहनत और ईमानदारी से लाया वो हलचल।

    अटल था वो "अटल!

    कर्मठता का अद्वितीय उदहारण,
    सहज व्यक्तित्व, उदार सज्जन,
    मर्यादाओं में रहकर भी रहा जो प्रबल।

    अटल था वो "अटल'!

    सुशासन का स्थापित किया प्रतीक जिसने,
    झुकना न कभी स्वीकारा उसने,
    विरोधियों की विचारधारा को किया अचल।

    अटल था वो "अटल!

    ©_sourav___singh_

  • _sourav___singh_ 58w

    जय श्री राम

    जानती है दुनिया,
    जो नाम लिख रहा हूँ।
    उनकी कृपा से मैं तो,
    चारों धाम लिख रहा हूं।

    कर लो तुम अपने भीतर, संसार की स्मृति,
    हां मैं उसी विधाता का नाम ,
    श्रीराम लिख रहा हूँ।
    जानती है दुनिया
    जो नाम लिख रहा हूंँ।

    उज्जवल है जिनकी गाथा,
    वो काम लिख रहा हूं।
    लहरो पे बांध बांधा,
    वो विद्यमान लिख रहा हूं।
    हैं संसार के रखवाले, संजोए रखना भीतर,
    मर्यादा पुरुषोत्तम, मैं राम लिख रहा हूं।

    हनुमान की भी गाथा,सब राम-राम मय है।
    लक्ष्मण भरत देवी देवता,सब राम-राम मय है।
    हिंद राष्ट्र का सेवक, सब राम-राम मय है।
    गूंजों तनिक तुम भी, जय श्रीराम लिख रहा हूं।

    राम की कथा तो विश्व में विख्यात है।
    मुरारी बापू से लेकर,
    हर राम भक्त करते राम की बात है।
    कोटि-कोटि है नमन, सृष्टि के जनक को,
    हां मैं उनके चरणों में, प्रणाम लिख रहा हूँ।

    जानती है दुनिया
    जो नाम लिख रहा हूँ।
    उनकी कृपा से मैं तो,
    चारों धाम लिख रहा हूं।

    ©_sourav___singh_