_rita_chaudhary_

well I'm not interested in writing quotes but i can surely make yu smile if yur day is going bad enough����.

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  • _rita_chaudhary_ 89w

    हम मेहनतकश किसान

    हम मेहनतकश किसान कर रहे हैं सरकार से,
    सिर्फ तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग
    पर सरकार इसे नाजायज मांग क्यों समझ रही है ?

    हम मेहनतकश किसान कर रहे हैं सरकार से
    हम किसानों के साथ बातचीत कर इसकी जगह
    नएकानून को लाने की मांग पर सरकार इसे अपने खिलाफ एलान-ए-जंग क्यों समझ रही है?

    हम मेहनतकश किसान कर रहे हैं सरकार से
    केवल इतनी-सी मांग ए सरकार! यह तीनों
    कानून जो नहीं किसानों के हित में और हैं
    निजीकरण को बढ़ावा देने वाले वापस ले लो,
    पर सरकार इसे मूंछ का सवाल क्यों बना रही है?

    हम मेहनतकश किसान कर रहे हैं सरकार से
    जो कर रही है हमें बिचौलियों से बचाने का वादा एक सवाल?
    हमारी फसलों और जमीनों पर उनकी जगह जमाखोरों और कारपोरेट घरानों के कब्जे में किस तरह से सरकार हमारा हमारा फायदा देख रही है?

    हम मेहनतकश किसान कर रहे हैं सरकार से
    एक विधेयक के जरिए केवल यह भरोसा देने की मांग कि एमएसपी और कन्वेंशनल फूड ग्रेन खरीद सिस्टम खत्म ना हो पर सरकार इतनी सी मांग को को अपनी शान के खिलाफ क्यों समझ रही है?

    हम मेहनतकश किसान कर रहे हैं सरकार से यह सवाल की विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकार के प्रयोग पर यह मीडिया हमें भटका, बहकावे में आया हुआ, अर्बन नक्सलवादी और भी पता नहीं क्या-क्या क्यों बता रही है?

    हम मेहनतकश किसान पूछ रहे हैं सरकार से
    हम जो कि पहले से ही झेल रहे हैं अतिवृष्टि सूखा महाजन गरीबी भूख कर्ज लगान की मार कहां जाएंगे जब कि सरकार भी हमारी बात नहीं सुन रही है?

    हम मेहनतकश किसान जिनकी है वोट बैंक के रूप है बेहतर पहचान पूंजीवादी व्यवस्था स्थापित हो जाने के बाद हमारा वोट बैंक के रूप में प्रभाव हो जाएगा बेहद सीमित, सरकार शायद इस बात को बहुत बेहतर ढंग से समझ रही है?

    -रीता चौधरी
    ©_rita_chaudhary_

  • _rita_chaudhary_ 89w

    रात गुजरी चांद छुप गया

    लोगों जगो बियाबान की ओर रवाना होओ
    इस बेदर्द शहर से मोहब्बत दिखाना क्यों ।
    दरिंदो को अमन से वास्ता क्यों
    जोगी को शहर में घर बसाना क्यों।

    रात गुजरी चाँद छिप गया,किवाड़े भी लग गई फाटकों में,
    जब रात ढले घर आये हो तो सजनी से नया बहाना क्यों।
    फिर होगी विछोह की लम्बी रात पिया
    बची प्रेम के लिए शेष यही एक घङी ही क्यों।

    दिल की बातों को मन में मत कैद करो।
    डरना झिझकना और लजाना क्यों ।
    दिन रात जो उनको सोचा था,वो सपने जैसा लगता है ।
    दिन एक जो मुलाकात हुई उनसे, लगता है वह
    किस्सा एक पुराना क्यों ।

    जिस रूप के सच्चे सोने को महसूस किया
    पर कर न सके स्पर्श कहें उसको दौलत और खजाना क्यों।
    उनको भी मिटा ए ठेस लगे दिल एक सुर्ख अंगारा बन
    इस तरह से खारा आँसू बन आँखों से ढुलक जाना क्यों।

    बन आंधी छा जाना आसमां पर,
    इस तरह से पानी बन धरती में मिल जाना क्यों।
    अब शहर के लोग अटकाने लगे हैं रोड़े राहों में
    तो बियाबान में जाकर आराम करें न क्यों।

    बहकी बहकी बातें जो नहीं करें
    फिर भी लोग कहें उनको पागल दीवाना क्यों।

    -रीता

  • _rita_chaudhary_ 120w

    सुखद अनुभूति

    तुम्हारे जन्म से अधिक आनंददायक क्षण
    तुम्हारे जन्म लेने से पहले और तुम्हारे
    जन्म लेने के बाद मेरे लिए इस संसार में
    कभी नहीं रहा और ना कभी होगा।

    तुम्हारा जन्म ना केवल मेरे और तुम्हारे पिता
    के लिए बल्कि तुम्हारे दादा दादी नाना नानी
    और परिवार के सभी सदस्यों के लिए भी
    अति उत्साह से भरा बहुप्रतीक्षित पल था।

    तुम्हारे सुंदर सौम्य चेहरे,तुम्हारी पहली
    मनमोहक मुस्कान, तुम्हारी पहली रोने की
    आवाज ने ना केवल मेरा बल्कि तुम्हारे जन्म के
    समय मौजूद हर किसी का मन मोह लिया था।

    तुम्हारे जन्म को लेकर आज भी मेरे मन मेंऔर परिवार
    के अन्य सदस्यों के मन में बहुत सारी ना भुलाई जा सकने वाली स्मृतियां शेष है और मैं आज भी उन स्मृतियों के स्मरण मात्र से ही उतना ही आनंदित होती हूं।

    मेरा दिल मां बनने की खुशी के कारण आनंद मग्न था
    मेरा मन मां बनने की उपलब्धि और तुम्हें पाकर गर्वित था
    तुम्हारा चेहरा देखते ही मैं सारे दैहिक कष्टों को भूलकर
    अपनेअंदर एक नवीन ऊर्जा का संचार महसूस कर रही थी।

    तुम्हारा जन्म जीवन का सबसे पीड़ादायक क्षण था
    तुम्हारा जन्म जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षण था
    पर फिर भी मैं यह निश्चित रूप से कह सकती हूं
    वह सबसे आनंददायक और प्रतिफलदायक क्षण था।

    -रीता चौधरी
    ©_rita_chaudhary_

  • _rita_chaudhary_ 134w

    विरोध का विरोध

    जा रहा है बढ़ता आजकल,
    विरोध का विरोध,
    करने का प्रचलन।

    जिस देश में हो,
    स्वतंत्रता सामाजिक बुराइयों से,
    अब भी हो स्वप्न।

    भ्रष्टाचार, सत्ता और ताकत
    का जहां हो रहा हो
    मनमाना प्रयोग।

    नहीं उचित है बिल्कुल भी,
    विरोध का विरोध वहां
    और है घातक बेहद।

    देगा कर यह संविधान
    और न्याय का
    खाका कमजोर।

    देगा कर मौलिक अधिकारों का हनन,
    बदल देगा राज्य का,
    मूल चरित्र और स्वरूप।

    देगा बढ़ा अमीर गरीब का अंतर,
    कर देगा पूंजीवादी व्यवस्था को प्रतिस्थापित,
    इसके चरम पर।

    बना देगा यह सरकार को गैर जिम्मेदार,
    हाशिए पर खड़ा व्यक्ति हो जाएगा,
    रोटी, शिक्षा और इलाज से लाचार।

    देगा कर लोकतंत्र की जड़ें खोखली,
    भर भरा जाएगा,
    लोकतांत्रिक गणराज्य का स्वरूप।

    है एक पावन चीज विरोध,
    ऐसे देश में जो है हर प्रकार के,
    भेदभाव का शिकार।

    ना केवल है हथियार विरोध,
    अपितु है यह लोक तंत्र की सेहत का,
    पैमाना भी।

    -रीता
    ©_rita_chaudhary_

  • _rita_chaudhary_ 135w

    नया साल

    प्रवेश किया है हमने नए साल में,
    नई उम्मीद और आशाओं के साथ।
    याद कर रहे हैं कुछ बीते साल को
    अनुरक्त भाव के साथ,
    खुश है कुछ 2019 बीत जाने के साथ।
    नहीं रहा होगा कुछ लोगों के लिए
    अच्छा यह साल,
    कुछ लोगों के लिए रहा होगा,
    यह साल बेमिसाल।
    पर सुख-दुख उतार-चढ़ाव
    सभी अनुभवों के साथ
    चलती रहती है जीवन यात्रा अनवरत।
    उठाया जा सकता है आनंद
    जीवन यात्रा का केवल तभी,
    जब कम सामान लेकर
    अपने साथ चले सभी।
    परंतु ढोते रहते हम बहुत सारी
    यादों का बोझ साल दर साल।
    है साक्षी इस बात का यह कि हम हैं
    चाहते वर्तमान के बजाय भूत में जीना।
    नहीं चाहिए हमें यादों के बोझ,
    के साथआगे बढ़ना।
    हो चाहे वह अत्यधिक खुशियों का बोझ,
    चाहे हो वह अत्यधिक दुख का पहाड़।
    हो जाता है कम महत्व वर्तमान खुशियों का
    याद करने से निरंतर बीते हुए समय को।
    नहीं ला सकते बीते समय को वापस हम
    रहा हो चाहे वह कितना भी आनंददायक क्यों न।
    नहीं आरंभ हो सकता है जीवन का नए सिरे से पुनः
    करते रहते यदि याद हम निरंतर भूतकालीन दुःखों को।
    मंत्र यही है सुखी जीवन का स्वीकार करें हम हर दिन को
    उसी रूप में जैसा हो वह सम्मुख हमारे प्रस्तुत,
    करें स्वागत उसका पूर्ण उत्साह और सकारात्मकता से।
    तभी प्रारंभ होगी आज की सुंदर यात्रा जब,
    करने देंगे बीते हुए समय को हम सम्मान पूर्वक प्रस्थान।

    -रीता

  • _rita_chaudhary_ 135w

    संतान

    सोशल मीडिया के गलियारे में
    दिखी एक लाइन लिखी
    भाग्यवान हैं वो इंसान
    बेटी है जिनकी पहली संतान।

    पर उसी गलियारे में कभी नहीं
    दिखा यह लिखा कि परम भाग्यवान
    हैं वो इंसान बेटी ही है जिसकी दूसरी
    भी संतान ।

    और मन में उठा यह सवाल यह उसी
    पुरानी सोच का नया संस्करण तो नहीं
    जिसमें पहली बेटी लक्ष्मीस्वरूप और
    उसके बाद जन्म लेने वाली बोझ समान।

    मन में उठा यह भी सवाल कि क्या अभागे
    हैं वो इंसान जिनका बेटा है पहली संतान
    और वे परम अभागे! बेटा ही है
    जिनकी दूसरी भी संतान।

    ऐ नादान तू कब समझेगा कि बेटा बेटी दोनों
    हैं एक समान, जब समान लोगों में एक को
    बताता है तू महान, भाग्यवान तो अनजाने में
    ही सही तू करता है दूसरे का अपमान।

    सन्तान को बेटा बेटी में बाँटना ही है
    दुनिया का पहला बंटवारा और है दुनिया
    में मौजूद हर भेदभाव की जननी, बुनियाद
    और प्रथम सोपान।

    मत समझ अपनी संतान को
    अपना गर्व इज्ज़त और अभिमान,
    यह समझ बनाती है तेरी संतान को
    तेरेअहं का पर्याय।

    सन्तान को बेटा बेटी में बाँटना छोड़कर
    उनको समझ केवल इंसान और समझ
    अपने कलेजे का टुकड़ा,मन की शांति
    और दिल का अरमान।


    -रीता