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Reposts
  • _laconic 19w

    Women,- who give birth to this universe ��

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    ...

    ©_nishu

  • _laconic 20w

    Conflict between mind and heart, like and dislike, nature and appearance, love and hate, mine and yours, fact and imagination, truth and untruth, faith and betray and many more,

    We have a habit to reassemble every feeling according to our sense of understanding. Sometimes, what we think or assume, that not be happen actually. It's all our analysing/ assumption which force us to accept things according to our willingness.

    In this world willingness is the only thing which push us to get what we want. In our life, we all have different need, choice, happiness, satisfaction, peace and goals.

    When something happens according to our desire we feel happy but when it goes against our wish we become sad and sorrowful but we should always have faith on our God because in the end everything will be fine and our soul will convince us with what we have.

    It is very important to listen our voice of soul during these conflicts, because voice of soul never lie us and show a path to us to get peace of mind, happiness, satisfaction, quality of life, and many more we need.

    ❥NR....

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    Conflict

    ©nishu

  • _laconic 34w

    Firstly, I would like to wish you on your special day, Many-Many Happy Returns Of The Day����❤️
    Today is not just your special day��but it's also mine��. I'm so freaking lucky to have a friend like you. Our bond is precious and you are so special to me. You are my Bhuri billi��. You are so cute like a baby girl �� and mature like a himawari��. May god bless you ��. Enjoy your day��and Marry soon��.

    Lov you��❤️����❤️��

    Thank you so much for reading my Vallahhh....tinngaa....bla....bla...bla������

    @pritty_sandilya

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    .

    निश की प्रीत से मीत
    सदा जुड़ी रहे,
    तुम्हारे मुखारविंद पर
    'भव्य' सुरम्य सी मुस्कान
    निरतंर बनी रहे।।

    ओस की बूंदों सा
    चित्त हो तुम्हारा,
    और पत्तियों की तरह
    सर्वदा तू निखरती रहे।।

    खुशियों के उपवन में,
    तुम्हारी खुशियों का पुष्प
    ताउम्र खिला रहे।।


    इस शुभ अवसर पर
    यही अर्ज आज मैं
    ईश से करूँ।।

  • _laconic 41w

    .

    जब दीप सा
    जल उठे मन
    तब निर्मोही मंजीर की
    अनुगूँज पर,थरके कदम
    दिखे कटाक्ष नेत्र में निशा
    हिय में उठे,स्वरों का कम्पन
    जब दीप सा
    जल उठे मन,,,

    नृत्य की ताल पर
    मनमोहन मेघों का संगम
    देख सन्दर्भ प्रसंग की
    अविस्मरणीय उत्पत्ति
    प्रेम से प्रफुल्लित हो उठे
    भीतर का गगन
    जब दीप सा
    जल उठे मन।।
    ©_निशु

  • _laconic 47w

    .

    कहने को तो दो वारी ही मिली हूँ तुझसे,
    पर सच तो ये है
    मिल के भी न मिली हूँ तुझसे।।
    ©_निशु

  • _laconic 47w

    अस्तित्व एक पहचान
    (((किन्नर)))

    किम् + नर = किन्नर

    "गाना बजाना के माध्यम से जीवन यापन करने वाली जाति"

    हम सभी जानते है कि प्रकृति ने ही नर और नारी वर्ग के साथ ही एक और वर्ग का सृजन किया है। जिसे उभयलिंगी वर्ग कहते है। समाज में ये अलग -अलग नामो से भी व्याप्त है, जैसे➖ छक्का, हिंजड़ा, किन्नर, और थर्ड जेण्डर।

    इनके बारे में जानने के लिए, लोगो के अंदर उत्सुकता देखी गयी है।
    ये कहाँ से आये है, इनका जन्म कैसे हुआ, क्या ये इससे पहले भी थे आदि।

    अगर हम वेद पुराणों, पौराणिक कथाओं की बात करे तो कहा जाता है.....

    ⚜️शिव पुराण⚜️
    सृष्टि के आरंभ में ब्रम्हा जी ने अपनी योग शक्ति से पुरुषों को उत्पन्न किया था..लेकिन और मानव और जीवो को उत्पन्न करने में लग रहे समय को देखते हुए उन्होंने तब शिव जी से निवेदन किया। तब शिव जी ने अपने आधे अंग में स्त्री रूप को उत्पन्न किया। जिससे अर्धनारीश्वर रूप प्रकट हुआ, और वही से किन्नर की परिकल्पना हुई।

    ⚜️महाकाव्य महाभारत⚜️
    महाभारत में अर्जुन ने भी एक साल के लिए किन्नर रूप धारण कर बृहन्नला नाम रख लिया था। और करुक्षेत्र में शिखण्डी ने पांडवों के पक्ष में युद्ध कर भीष्म जी की मृत्यु का कारण बना था। जो की एक किन्नर चरित्र था।

    ⚜️रामचरित मानस⚜️
    रामचंद्र जी जब वनवास से लौटते है , तब किन्नर समाज उनका स्वागत करती है, राम चन्द्र जी के पूछने पर, बताते हैं कि आपने समस्त नर व नारी को जाने को कहा था। हम न नर है न नारी। तब राम चन्द्र जी उनकी भक्ति से प्रशन्न होकर उन्हें वरदान दिया था । तुम जिसे भी आशीर्वाद दोगे उसका अनिष्ट कभी नही होगा ।


    ⚜️वैज्ञानिक दृष्टिकोण⚜️
    जब कोई स्त्री गर्भवती होती है और गर्भ के
    दौरान कोई बीमारी या कोई समस्या हो तो ..दोनों तरह के आर्गन शिशु में आने लगते है। तब यह स्थिति देखने को मिलती है।

    संसार के दलदल से बेखबर, माँ के आँचल से दूर हो जाती है।
    आँसुओ की ओट में, वह जीवन निर्वाह कर जाती है।
    मिलती है जिनसे बद्दुआएं, उन्ही के घर उन्हें आशीष दे आती है।
    ईश्वर से मिले वरदान को, वह बखूबी निभाती है।

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    .

    अक्सर जहन में
    एक सवाल उठता है।
    चित्त को विदीर्ण कर,
    भीतर तक चुभता है।
    ईश्वर की इस
    अनमोल शख्शियत से
    मानव कैसे
    मुख मोड़ सकता है।

    हे मुर्ख मानव...,

    जिसे देख तू
    अट्टहास करता है।
    सच तो ये है,
    तू उस महाकाल के
    अर्धनारीश्वर रूप का
    उपहास करता है।
    ©_निशु

  • _laconic 47w

    .

    चित्त अरुणाई से, हिय तुम्हे निहारे,
    देख छवि तेरी, मंद-मंद मुस्कावे।।

    ©nishurastogi

  • _laconic 48w

    गुज़ारिश

    मेरी उलझी सी ज़िन्दगी में, खुद को न उलझाओ तुम,
    ले लो कदम पीछे अपने, और आगे बढ़ जाओ तुम।।
    ©nishurastogi

  • _laconic 51w

    पता नही क्या ही लिख दिया है,��पहली बार लिखी हैं न ग़ज़ल��
    अब जैसी भी हो झेलनी पड़ेगी आपको��..मैं कुछ न कर सकती इसमें।।��

    #random #avai #kuch_bi

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    // ग़ज़ल //

    नयन धरातल से ख़्वाब तेरे दरकिनार करने लगी हूँ,
    शायद तुझसे ज्यादा तुझे मैं समझने लगी हूँ।

    तेरे फरेबी बातों की कश्ती खुद ही डुबोने लगी हूँ,
    बन कर राहगीर जमीं पर पैदल चलने लगी हूँ।

    थक गयी थी अंदर के शोर को शांत करते कराते,
    बनाकर उन्हें अल्फ़ाज़ ग़ज़ल करने लगी हूँ।

    सीने में दफ्न रह गए थे जो तेरे दिए ज़ख्म,
    उन पर ख़ामोशी का मरहम लगाने लगी हूँ।

    तुम्हें मुझसे मोहब्बत मुझे तुमसे मोहब्बत,
    उसे भूल समझकर अब भूलने लगी हूँ।
    ©nishurastogi

  • _laconic 51w

    अरे ओ भाई जी...��...आज आपका धरावतरण दिवस है�� ...ये मुझे पता न था ��...अभी पता चला ��...इसलिए पता नही क्या लिख दिया है��... अगर पहले से पता होता तो शायद कुछ अच्छा लिख पाती।। ��



    प्रार्थयामहे भव शतायुषी।
    ईश्वर: सदा त्वां च रक्षतु।।
    विजयी भवतु सर्वत्र सर्वदा।
    जगति भवतु तव यशगानम्।।
    जन्मदिवस कोटिशः शुभकामना:।।

    ♥️♥️������������♥️♥️

    @sanjay_kumr

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    भाई जी

    ❇️❇️

    हे धीर अनुज
    जीवन पथ पर
    सृष्टि के सिफर सा
    अंत में अनंत
    पार से पर्यन्त
    ओज रख
    निज अन्तर्मन में
    नव प्रेरणा को
    जागृत करना।।


    हे धीर अनुज
    कभी धधके अगन
    द्वेष, अहम्मन्यता,
    रौद्र की
    तब शांतिप्रिय
    प्रतिध्वनि से
    प्रीत के सार का
    प्रसारण करना।।


    हे धीर अनुज
    जीवन उद्देश्य
    पूर्ण हेतु
    शूल सी राहों पर
    सामर्थ्य से परिपूर्ण
    प्रबुद्ध व्यक्ति सा
    संजय नाम सार्थक
    करना।।

    ❇️❇️

    धरावतरण के सुअवसर पर
    ये छोटी-सी मनोकामना
    और ये शब्दशीश ही
    हैं आज मेरे आशीष।।।
    ©निशु