_jaat_sahab__

Jeet choudhary

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  • _jaat_sahab__ 1d

    तुम्हें हैरत तो नहीं अभी गैरत बचीं है मुझमें
    ये शौहरत तुम्हें मुबारक अभी औरत बची है मुझमें
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 1w

    क्या बताऊं तेरे साथ बिताएं पल और किसे बताऊं
    में कातिब बताऊंगा इस कलम को जो जाकर कह देंगी कागज़ से और कागज़ को तो तुम जानती हो जिससे भी मिलेगा उसे बता ही देगा।

    क्या बताऊं तेरे बदन की खुशबू बदन तेरा बिन इत्र भी महकता था।
    क्या बताऊं जहा हम मिलते थे हर दफा़ ।कभी वहा जाता हूं तो वो दरख़्त भी महकता है जिसके तने पर तुने अपनी पीठ टिकाई थी ‌
    वो दरख़्त मुझसे कहता है अब आती नहीं वो तुम्हारे साथ
    क्या हुआ ?
    में भी हस कर कह देता हूं तुम दुर बहुत पड़ते हो हमारी राह से
    तभी दरख़्त की बात सुनकर मेरी मुरझाईं कमीज़ मुझसे कहती हैं
    बता तुने मुझे क्यों धोया ?
    क्या बताऊं मुझे कमीज़ के सवाल का जवाब नहीं मिला ‌
    में चला आया तेरी क़ब्र पर वहा से एक मुठ्ठी मिट्टी उठाई और कमीज़ की जेब में रख दी अब वो खिल गई ‌
    और मैंने उससे कहा शुक्रिया मुझे फिर से जिंदा करने के लिए
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 4w

    "लुत्फ़-ए-मय" में "लुत्फ़-ए-सुख़न "भुल जाता हूं
    में अक्सर मय पी-कर खुद का नाम भुल जाता हूं

    ख़ल्वत में तिरी याद दिल में आग लगा देती हैं
    और मैं बावरा महफ़िल में बैठना भुल जाता हूं

    बताना मत मेरे शबिस्ताँ में हर रात हूरों का मेला लगता है
    पर कभी कभी में मय पी-कर मेला देखना भुल जाता हूं

    में बेवफा सोख़्ता-जाँ क्या ही लिखुंगा इश्क-ए- नग़्मे मिरी जाॅं
    में तो सुबह होते ही विसाल-ए-यार का नाम तक भुल जाता हूं
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 4w

    तेरे दिखाएं ख्वाबों से इस कदर नफ़रत हुई
    मेने सोने के लिए सिरहाना लगाना छोड़ दिया

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    सर्द रात भर सोता रहा में उस खाट पर
    जिस पर तुने दुपट्टा सुखाना छोड़ दिया

    अब मैं सर्दी में भी नहीं बैठता चुलहे के पास
    जब से तुने मेरे घर रोटी बनाना छोड़ दिया

    ख़ैर ग़ैर तुझे अच्छे लगें कोई बात नहीं
    मेने भी अपनों के करीब रहना छोड़ दिया

    मेरी डोर ही कोई और ले गया क्या कहुं
    यही कहुं मेने पतंग उड़ाना छोड़ दिया
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 6w

    इक तितली ढुंढ रही थी रात में उजाला
    जिसका दोस्त था इक जुगनू मतवाला

    वो तितली ढुंढ रही थी रात को उजाला
    जिसके खुद के वर वसन जल रहें थे
    आग पर चलते चलते पांव तल रहे थे

    इक तितली ढुंढ रही थी रात में उजाला
    जिसका दोस्त था इक जुगनू मतवाला

    भुखी प्यासी भंवरों के डर के मारी
    इक फुल बन गया उसकी बिमारी
    और बगीचों पर बैठे थे माली

    फिर वो भागी आगे आई फुहार बादलों की
    कुछ बुंदे उसके पांव में पड़ी थी
    ज़माने की फसल खराब होने से डरी थी
    वो वहीं कोयलें पर खड़ी थी

    फिर कहीं दुर बहुत दुर दिखा उसे उजाला
    वो आसमान में खडी और उसकी लाश जमीं पर पड़ी थी

    इक तितली ढुंढ रही थी रात में उजाला
    जिसका दोस्त था इक जुगनू मतवाला
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 6w

    में काहिल बारिश-ए-सर्द के मारे मर रहा था
    और उसने अपने होंठों पर आग जला रखी थी
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 7w

    बहानों के तरकस से रोज इक तीर निकाल लाती है
    सुबह-सुबह का भी इंतजाम कुछ ऐसा कर आती है

    यहां से दबे पांव गैरों के आंगन पाज़ेब छनकाती है
    मुझे तो क्या रात को भी लोरी सुना के सुला जाती है

    कोई साबुन है ? ये मिरी रूह का दाग धुलेगा कैसे
    इतना कहते ही छुरी उठा मेरी कलाई काट जाती है

    ये गुस्ताख दिल अब दुखता रहता है चौधरी जी
    गांव में हर साल बहरूपिए की टोली आती है
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 8w

    दिल-ए-शरार अब आब में जलती है
    मेरी परछाई मेरे खिलाफ़ चलती है

    तुम नमक लगाना जख्मों पर धीरे-धीरे
    ये जल्दबाजी मुझे अच्छी नहीं लगती है

    ये चश्म तुम्हारे आबदार है मिरी जान
    तुम्हारे हाथों में छुरी अच्छी नहीं लगती है

    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 8w

    इक झल्ली जी कुड़ी जिदे घुंघराले बाऴ
    औदी हर अदा सचमुच इक सवाल

    दंदा च घुट के बुल्ल जदो लंगदी पनघट चो
    खू ता पाणी भी अंदरो ही अंदरो मारे उबाऴ
    ©_jaat_sahab__

  • _jaat_sahab__ 10w

    इक यादों के बंद कमरें में जी लुंगा में
    दुनिया डरती है मुझसे बताओं क्या लुंगा में

    इन विरान पड़ी आंखों में अब आंसु रहते हैं
    मुझे किसी की जरूरत नहीं अकेला रह लुंगा में

    मेरे दिल में ख्वाबों की जगह तनहाई रहती है
    अब इस दिल के साथ जंग-ए-म्यान में रह लुंगा में

    यु हर बार दिल दुखाते हो तुम मेरा नासमझों
    मेरे अपने हों दवा ले ले के तुम्हारे साथ रह लुंगा में

    और कुछ इस तरह दिल की फसल गला लुंगा
    बरसात में थोड़ा सा आंखों का पानी मिला लुंगा में

    इस पुरी दुनिया के रस्ते खराब है जीत
    अपनी इक नई मंजिल बना लुंगा में
    ©__jeet__