_harsingar_

nature worshipper

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  • _harsingar_ 4d

    तेग़-ए-कोह = पहाड़ की चोटी

    किसी को घेरती है जब कभी भी
    कितनी तन्हा होती है खुद भी ये तन्हाई
    बिखर जाती है वरकों पर लफ्ज़ दर लफ्ज़
    जब कभी ऊब जाती है ये तन्हाई
    सिमट जाती है धूप जब तेग़-ए-कोह में
    कितनी राहत देती है ये तन्हाई


    डॉ सीमा अधिकारी

  • _harsingar_ 1w

    #five_words

    बारिश, साड़ी , आँखें ,काजल होंठ
    काफी पहले दिए गए शब्द आज भेज रही हूं

    @political_guruji @jigna_a @amateur_skm क्या ख्याल है जिग्ना, सौरभ फिर से शुरू किया जाए क्या मुमकिन है ये @deepajoshidhawan #rangkarmi_anuj #go_win_the_heart


    आज फिर साड़ी का आंचल लहराने को जी चाहा है
    इक ज़माने के बाद
    काजल भरी इन आंखों ने फिर शर्म से झुक जाना चाहा है
    इक ज़माने के बाद
    अपने होंठों की लर्ज़िश को फिर आजमाने को जी चाहा है
    इक ज़माने के बाद
    बारिश से भीगे आंगन को फिर से निहारने को जी चाहा है
    इक ज़माने ये बाद
    तेरे अहसास भर ने दबी ख्वाहिशों को फिर से हवा दी है
    इक ज़माने के बाद

    डॉ सीमा अधिकारी

    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 1w

    जन्म दिवस की ढेरों शुभकामनाएं मेरे बच्चे

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    इक पूरा हुआ सा ख्वाब है वो
    हर इक सवाल का जवाब है वो
    इक प्यारी सी किताब है वो
    कुदरत की चित्रकारी है वो
    कुबूल हुई दुआ जैसी
    लुकमान की दवा जैसी
    बेटी नहीं पूरा जहां है वो
    जन्नत है मेरी जहां है वो

    डॉ सीमा अधिकारी

  • _harsingar_ 2w

    @mrig_trishna_ आप किसी एक पर तोहमत नहीं लगा सकते �� एक सुनामी है तो दूसरा तूफान

    @jigna_a @amateur_skm

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    हुस्न और इश्क को अलग जब जब किया
    इम्तिहां दोनो ने तब तब दिया
    हद में किसी को बांध सकते नहीं
    तोहमत तुम लगा सकते नहीं
    इश्क और हुस्न की हद अगर होती
    ना चंद्रमुखी होती ना ही पारो रोती

    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 3w

    #nayab_naushad
    नौशाद जी को श्रद्धा सुमन के रूप में
    चार पंक्तियां


    इक कलम हुई मौन है
    सोचती अब उसका कौन है
    कुछ भीगे अल्फाज, चंद एक खयालात
    उन्हें गजल या रूबाइयों में
    जो ढाले अब वो कहां है
    चला गया वो जहां, दूसरा ही इक जहान है
    ओ मौत तू थोड़ा रहम तो खाती
    जाने वाले का पता ही दे जाती



    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 4w

    सूख गया वो गुलाब तो क्या
    कभी तुमने दिया ये अहसास बाकी है
    कैद है खुशबू कुछ वरकों में,
    महक उठने को इतना काफी है

    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 5w

    मुझे चांद की नहीं थी आस
    अपने हिस्से के आसमां की चाहत थी
    दरकार नहीं थी गुलों की भी
    बस इक पासबान की चाहत थी

    चांद बन जाती मैं खुद ही
    आसमां जो तुम मेरे होते
    गुल दिल के खुद ही खिल जाते
    बागबान जो तुम मेरे होते

    गुजर जाती स्याह अंधेरों से
    उन आंखों के नूर जो राह दिखलाते,
    मेरी हर राह रोशन हो जाती
    तेरी चाहत के जुगनू जो मिल जाते

    सदाएं तेरी यूं ही हर सू
    जबरन आ ही जाती हैं
    अनसुना मैं लाख करती हूं
    दिल की नादानी में अक्सर
    मैं धोखा खा ही जाती हूं



    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 5w

    यूं ही बेवजह ये बादल न बरसे होंगे
    बेरुखी किसी की देख के तरसे होंगे
    बेबस दिल में घटाएं कई उमड़ी होंगी
    तेरी बज़्म में अब ना मेरे चर्चे होंगे

    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 6w

    #hindinama #mirakee #hindilekhan #loveariddle दिल को जो लगा लिख दिया जवाब चाहिए @jigna_a @shriradhey_apt @amateur_skm @rangkarmi_anuj सौरभ अगर समय हो तो कुछ बताओ

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    प्रेम रिक्त इस हृदय वीणा को
    कैसे मैं झंकृत कर पाऊं
    प्रेम का अंत सुखद
    मैंने कभी ना पाया है
    तुम्ही कहो ओ मीत मेरे
    मैं प्रेम गीत कहां से लाऊं

    सरिता से सागर का वो निश्छल प्रेम
    मुझको भी करता सम्मोहित
    समा के सागर में वो फिर
    क्यों खारी जो जाती है
    तुम्हीं कहो हे मेरे प्रियवर
    मैं इस मन को क्या मैं समझाऊं
    मैं प्रेम गीत कहां .......

    दीपक बाती साथ जले तो
    उजियारा हर कोना होता है
    मधुर मिलन से दोनों के
    रंगीन समा हो जाता है
    सब कहते दीपक है जलता
    बाती अनदेखी रह जाती है
    बाती के बुझने पर दूजी बाती से,
    दीपक फिर रोशन हो जाता है
    इस स्वारथ के प्रेम को मैं क्यूं समझ न पाऊं
    मैं प्रेम....


    बाती को जलते देख
    शलभ भी यों खुश होता है
    बाती जो दीपक साथ जली
    उस पर वो मर मिट जाता है
    उन दोनों के प्रेम में
    वो क्यूं बेगाना रह जाता है
    फिर बाती और शलभ का प्रेम
    क्यों न अमर हो पाता है
    इस अनूठे प्रेम को मैं दिल में बिठा ना पाऊं
    मैं प्रेम गीत कहां से लाऊं

    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 6w

    सब कुछ वही होते हुए भी कई बार क्यों ऐसा होता है कि बात वो नहीं लगती जो होनी चाहिए क्या ये समय की लकीर्रे हैं, जो हमें दिखाई नहीं देतीं @shriradhey_apt आपके इस शेर के मुझे अंदर तक छुआ है आभार आपका। @amateur_skm

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    दिल वही है जस्बात वही हैं
    सिर्फ अब वो हालात नहीं हैं

    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_